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कन्या गुरुकुल
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ओ३म् प्राचार्या परिचय
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आचार्या सुनीति आर्षविद्यामणि

वैदिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की संवाहिका

प्राचार्या · महर्षि दयानन्द आर्ष कन्या गुरुकुल, पानीपत

शैक्षणिक यात्रा

आचार्या सुनीति जी का जीवन वैदिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा को समर्पित रहा है। आरम्भ से ही उन्होंने संस्कृत, व्याकरण एवं वेदों के गहन अध्ययन में रुचि ली और आर्ष परम्परा के अनुरूप अपनी शिक्षा को सुदृढ़ किया। उन्होंने प्राचीन गुरुकुलीय आदर्शों और आधुनिक शैक्षणिक पद्धति के समन्वय से अनेक छात्राओं का मार्गदर्शन किया है।

शिक्षा एवं उपाधियाँ

व्याकरणाचार्या
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
साहित्याचार्या (एम.ए.)
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)
बी.एड.
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
UGC-NET (JRF)
राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा · कनिष्ठ अनुसंधान अध्येतावृत्ति
पी-एच.डी. (शोधरत) (वर्तमान)
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली

उपलब्धियाँ एवं सम्मान

आचार्या जी ने अनेक राष्ट्रीय स्तर की वैदिक एवं शास्त्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता एवं उपलब्धियाँ अर्जित की हैं:

चतुर्वेद कंठस्थीकरणवेद-संगोष्ठीशास्त्रार्थअष्टाध्यायीधातुपाठयजुर्वेद कंठपाठवैदिक प्रश्नोत्तरी
विशिष्ट उपाधियाँ
  • आर्षविद्यामणि
  • वैदिकसिद्धान्तभास्कर
  • गुरुकुल शिरोमणि

प्राचार्या की कलम से

गुरुकुल केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विकास और राष्ट्र निर्माण का आधार है। मेरा उद्देश्य गुरुकुलीय शिक्षा को समकालीन समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ करना, वैदिक मूल्यों का प्रसार करना तथा संस्कारित, स्वावलम्बी एवं राष्ट्रनिष्ठ छात्राओं का निर्माण करना है।

— आचार्या सुनीति आर्षविद्यामणि